!! ॐ !!


Sunday, September 18, 2011

!! एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो... !!



हे! मेरे श्यामसुन्दर, हे! मेरे ठाकुर, हे! मेरे कन्हैया...




एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत गर मिलो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...



हम जैसे भी है सांवरे, तेरे मुरीद है...
अवगुण हमारे सांवरे, कर के दया ढको...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो न...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...



आये नहीं कि चल दिये, आना नहीं है ये...
आना तो उसका नाम है, मिलकर जुदा ना हो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो न...



माना की मुझमे भक्तों सी, कोई कसिश नहीं...
एक बार प्यारे सांवरे, इस दिल की भी सुनो न...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो न...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...



नरसी के सेठ सांवरे, मीरा के श्याम हो...
मुझको भी श्याम प्रेम में, बाँधो या फिर बंधो...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...



मैंने तो इश्क साँवरे, तुमसे बढ़ा लिया...
'नंदू' कन्हैया तुम भी तो, आगे जरा बढ़ो...
आना तो उसका नाम है, मिलकर जुदा ना हो...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो न...



एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो...
एक बार तो कन्हैया, हम जैसो से मिलो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...
मिलना उसी का नाम है, फुरसत से गर मिलो...



!! जय जय श्री कुँवर कन्हैया लाल की !!

!! जय जय श्री कुँवर कन्हैया लाल की !!
 
 

 
भजन : "श्री नंदू जी"

Monday, September 5, 2011

!! आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी... !!




एक भगवतत्व ही वास्तविक तत्त्व है, बाकी सब अतत्व है... जब तक अन्तः करण में संसार का महत्व तब तक अपने प्रभु का महत्व समझ में नहीं आ सकता है... इसलिए हम सभी को अपने भगवन से, अपने प्रभु से एकमात्र यही प्रार्थना करनी चाहिये कि, हमें सुमति दो तथा हमारी कुमति को दूर करके हमें अपने श्री चरणों में स्थान दो... एवं आप में हमारी प्रीति सैदव बनी रहे, ऐसी कृपा हम पर कर दो... क्योकि हम सभी के एकमात्र आधार केवल और केवल आप ही हो, इसलिए...


हे प्रिय श्यामसुन्दर, हे मेरे मन मीत...


आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...
ऐसी कृपा मुझे पे भी, हो प्रभु तेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...
ऐसी कृपा मुझे पे भी, हो प्रभु तेरी...



तेरी कृपा से स्वामी, मुझे ये लगन लगी है...
सत् पथ की राह टेढ़ी, मची मन में खलबली है...
मिट जाये सब अँधेरा, मिल जाये राह तेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...



करूँ निज करम जगत में, लेकर के नाम तेरा...
दिल में हो याद तेरी, मन में हो ध्यान तेरा...
समझू तेरे इशारे, बाते हो तुमसे मेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...



तेरा नाम लेकर सोंऊ, तेरा नाम लेकर जागू...
सपनो में श्यामसुन्दर, झाँकी तुम्हारी पाऊं...
होगा सफल ये नर तन, पाकर के प्रीत तेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...



हँसने लगे ये दुनिया, तेरा प्यार इस कदर हो...
दुनिया की हरकतों का, अब मुझ पे ना असर हो...
ढूँढू सदा में तुझको, कर आँख बंद मेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...



इतना करीब कर लो, सिर्फ तुम ही तुम, तुम हो...
तेरे नाम से ही शुरू हो, तेरे नाम पे ही खतम हो...
ये सिलसिला ना टूटे, हो जाये जीत तेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...



आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...
ऐसी कृपा मुझे पे भी, हो प्रभु तेरी...
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी...
ऐसी कृपा मुझे पे भी, हो प्रभु तेरी...



आप इस सुन्दर भाव को नीचे दिए गए लिंक पर क्लीक कर सुन सकते है...




!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!


!! भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है... !!


आज परम पुनित भादो मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी है... इसी पुनीत दिवस में, हम सबकी लाडली लाली श्री राधारानी का प्राकट्य, श्री वृषभानु जी और कीरति मैया के आँगन में हुआ... अतः आप सभी स्नेही प्रभु प्रेमियों को प्यारी प्यारी, बरसाने वारी, चाँद चकोरी, अति भोरी, जिसको प्रिय हो केवल श्यामसुन्दर बिहारी, ऐसी लाडली लाली श्री राधा रानी के श्री प्राकट्योत्सव की बहुत बहुत बधाई हो...




भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...
मोद रावल में छायो है, मोद बरसाने छायो है...
भरि गई कीरत जू की गोद...



प्रगटी कीरति नंदिनी राधा, उमड़यो जग में प्रेम अगाधा..
मिटगई सब भक्तन की बाधा, राधा बिना श्याम है आधा...
कृष्ण प्रेम की ध्वजा फरुखे, रस बरसायो है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...



हिल मिल कर आई वृजनारी, तन पे पहन कसूमल साड़ी...
लिये आरती मगल थारी, होत निछावर रूप निहारी...
वृज की शोभा देख आज सुरपति ललचायो है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...



लक्ष्मी, सची, शारदा, गौरी, आई सब रावल में दौड़ी...
दधि माखन की लिये कमौरी, लख न सकी वृज बनिता भोरी...
लाली की छवि निरख निरख, हियरो हुलसायो है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...



भानु भवन की शोभा राचे, जय जय श्री राधे धुनि माचे...
ब्रम्हा वेद स्तुति बाँचे, महादेव गोपी बन नाचे...
चित्रसेन गन्धर्व भाट बनकर, यश गायों है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...



सनकादि, नारद ऋषि आवे, रासेश्वरी के दर्शन पावे...
कहि कहि अद्भुत मर्म जनावे, नभ में देव पुष्प बरसावे...
स्थावर जंगम सब प्राणीन्ह को, भाग्य जगायो है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...



भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...
मोद रावल में छायो है, मोद बरसाने छायो है...
भरि गई कीरति जू की गोद, मोद रावल में छायो है...
मोद रावल में छायो है, मोद बरसाने छायो है...



श्री राधे... श्री राधे... श्री राधे...


!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!

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