!! ॐ !!


Saturday, July 30, 2011

!! लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी... !!



हे मेरे प्यारे श्यामसुन्दर... हे मेरे मोहन...



लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...
लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...



जाने कहाँ कहाँ पर, भटका तेरा दीवाना...
दर ये तेरा दयालु, मेरा आखिरी ठिकाना...
जिसपे किया भरोसा, उसने ही आँख फेरी...
लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...



मुझे थाम ले दुःखो से, आया हूँ हार करके...
थक सा गया हूँ प्यारे, जग को पुकार करके...
एक आश दिल में मेरे, बाकी है श्याम तेरी...
लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...



चरणों की धूल दे दे, मुझको भी हे दयालु...
भटका हूँ जिसकी खातिर, सच्ची खुशी वो पा लू...
ऐ 'हर्ष' तू बता दे, किस बात की है देरी...
लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...



लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...
लो आ गया अब तो श्याम, मैं शरण तेरी...



!! जय हो सैदव प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो सैदव प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!



भजन : "श्री विनोद जी अग्रवाल"

Saturday, July 16, 2011

!! काबिल बनाओगे ये मानता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ... !!



वास्तव में मनुष्य गलतियों का पुतला होता है, हम मनुष्यों से जीवन में जाने अनजाने कई अपराध हो जाते है, और हमें इस बात पर विचार करना चाहिये कि अपना अपराध स्वीकार करना ह्रदय की दुर्बलता न होकर ह्रदय का आत्मबल होता है... जाने अनजाने में किये गए सभी अपराध बोध को स्वीकार कर हम अपने आराध्य, अपने प्रभु से सच्चे ह्रदय से क्षमा याचना करे तो प्रम सत्य धर्म का पालन होता है, मन का एक बोझ उतर जाता और मन को शांति मिलती है... एवं शांति प्राप्त होने पर मन स्थिर रहता है, और मन के स्थिर रहने से चरित्र निर्मल बनता है...

अतः स्वयं का दोष स्वीकार करना महत्त्व का लक्षण है, सभ्यता का प्रतिक है... दोष स्वीकार कर लेने से मनुष्य बोझ एवं अशांति रूपी महासागर से डूबने से बच जाता है.. आइये हम सब भी अपने आराध्य से करवद्ध हो अपने जाने अनजाने में किये गए अपराधों के लिये क्षमा याचना करे...



हे! प्रिय श्यामसुन्दर, हे मनमोहन...



सुनो श्यामसुन्दर! क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...
सुनो श्यामसुन्दर! क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...



गलती के पुतले इंसान है हम, भले है बुरे है तेरी संतान है हम...
गलती के पुतले इंसान है हम, भले है बुरे है तेरी संतान है हम...
दया के हो सागर, मैं जानता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...
सुनो श्यामसुन्दर क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...



कश्ती को मेरी, साहिल नहीं है, तुम्हारे चरण के हम काबिल नहीं है...
कश्ती को मेरी, साहिल नहीं है, तुम्हारे चरण के हम काबिल नहीं है...
काबिल बनाओगे ये मानता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...
सुनो श्यामसुन्दर क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...



'सूरज' की गलती को दिल पे न लेना, सजा जो भी चाहो श्याम हमें तुम देना...
भक्तो की गलती को दिल पे न लेना, सजा जो भी चाहो श्याम हमें तुम देना...
करुणानिधि हो तुम पहचानता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...
सुनो श्यामसुन्दर क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...



सुनो श्यामसुन्दर क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...
सुनो श्यामसुन्दर क्षमा मांगता हूँ, हुई जो खतायें, उन्हें मानता हूँ...



आप सभी इस सुन्दर भाव को नीचे दिए गए लिंक पर क्लीक कर सुन भी सकते है..



!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!



भजन :"श्री सूरज कुमार जी"


Wednesday, July 13, 2011

!! जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो... !!


मृत्यु एक अटल सत्य है...और यह निश्चित है, एवं यह भी सत्य है कि प्रभु भक्ति से ही मृत्यु सुधरती है...प्रभु का स्मरण हमारा मरण सुधरता है... श्री भगवान का नाम स्मरण करते हुए जो प्राण त्याग करे, उसे भगवान की प्राप्ति अवश्य होती है, ऐसा श्रीमद गीता जी में योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है... इसलिए हे!  मेरे प्रिय श्यामसुन्दर, हे प्रिय मनमोहन, अब तो केवल इस ह्रदय की एकमात्र यही अभिलाषा शेष रह गयी है...



जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



तन श्याम नाम की चादर हो, जब गहरी नींद में सोया रहूँ...
कानो में मेरे गुंजित हो, कान्हा बस नाम तुम्हारा हो...
जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



रस्ते में तुम्हारा मंदिर हो, जब मंजिल को प्रस्थान करूँ...
चौखट पे तेरी मनमोहन, अंतिम प्रणाम हमारा हो...
जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



उस वक्त कन्हैया आ जाना, जब चिता पे जाके शयन करूँ...
मेरे मुख में तुलसी दल देना, इतना बस काम तुम्हारा हो...
जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



गर सेवा की मैंने तेरी, तो उसका ये उपहार मिले...
इस 'हर्ष' भगत का साँवरिये, नहीं आना कभी भी दुबारा हो...
इस तेरे भगत का साँवरिये, नहीं आना कभी भी दुबारा हो...
जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पे नाम तुम्हारा हो...
चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो...



आप सभी प्यारे श्यामसुन्दर के श्री चरणों में समर्पित इस अतिसुन्दर भाव को नीचे दिए गए लिंक पर क्लीक कर सुन भी सकते है...




!! जय जय हो प्यारे श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय हो प्यारे श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय जय हो प्यारे श्यामसुन्दर जी की !!


भजन : श्री विनोद जी अग्रवाल

!! बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है... !!


हे मेरे श्यामसुन्दर, हे मेरे गोविन्द, हे मेरे मोहन... तेरे दर पर दोनों हाथ पसार तुम्हारे श्री चरणों का दास तुमसे केवल यही एक प्रार्थना करता है, कि...



बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है...
तेरे दर पर हाथ पसार खड़ा, मैं याचक और तू दानी है...



मैं जब भी दर पर आया हू, कुछ तुमसे कह नहीं पाया हूँ...
हिम्मत न हुई कुछ कहने की, फितरत मेरी शर्मानी है...



बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है...
तेरे दर पर हाथ पसार खड़ा, मैं याचक और तू दानी है...



दुनिया की रीत रिवाजो से, मैं हार गया मैं हार गया...
अपने हारे इस बंदे को, प्रभु तुमको ही जीत दिलानी है...



बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है...
तेरे दर पर हाथ पसार खड़ा, मैं याचक और तू दानी है...



मैंने एक घरोंदा साँवरिया, तिनके चुन चुन बनवाया है...
तिनको के ताने बाने की, प्रभु तुमको लाज निभानी है...



बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है...
तेरे दर पर हाथ पसार खड़ा, मैं याचक और तू दानी है...



तू समरथ मैं कमजोर प्रभु, तेरे जोर से मैं इतराता हूँ...
नंदू 'विश्वास प्रभु सांचा, सांचो पे आंच न आनी है...



बनकर माँझी जीवन नैया, प्रभु तुमको पार लगानी है...
तेरे दर पर हाथ पसार खड़ा, मैं याचक और तू दानी है...



!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!


भजन : "श्री नंदू जी"

!! हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी... !!


हे मेरे प्रिय श्यामसुन्दर, आपके श्री चरणों के दास की आपके चरण कमलों में अरदास है, कि...



हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



ये माना की, गलती मुझसे हुई है, भुलाया है तुझको...
अपने पराये का, भेद न जाना, क्षमा करो मुझको...
आखिर तो मैंने, याद किया है, तुमको मुरारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



दीनों के नाथ तुने, दुखिया कोई हो, गले से लगाया...
गोद में बिठाके, उसके आंसू को पोंछा, थोडा थपथपाया...
करुणा के सिंधु, इधर भी नज़र कर, मैं कब का दुखारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



हमने सुना है कान्हा, तेरी खुदाई का, जोर नहीं है...
जाये कहाँ हम कान्हा, तेरे सिवा कोई, ठौर नहीं है...
दो बूंद सागर से, हमको को भी दे दो, हो तृप्ति हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



!! जय हो सैदव प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो सदैव दीनबंधु, कृपासिंधु भगवन की !!

!! दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना... !!


कभी कभी जब कोई प्रभु का प्रिय प्रेमी इन सांसारिक छल कपट आदि व्याधियो से पूर्ण रूप से त्रस्त हो जाता है तो वह अत्यंत ही व्याकुल होकर करुण ह्रदय से अपने प्रभु को पुकारता हुआ इस प्रकार अपने अंतर्मन के भाव को प्रभु के समक्ष प्रस्तुत करता है...




दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...
दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



तुमसे यह जीवन है, आधार हो तुम मेरा...
सच सच बोलू जी मैं, संसार हो तुम मेरा...
मुझ निर्बल ने ओ श्याम, तुमको ही तो बल माना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



गर तुम जो बदले तो, पुतला ये टूटेगा...
इस जीवन का सूरज, एक पल में डूबेगा...
इस प्रेम के बंधन को, मत तोड़ निकल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



तुम साथ जो मेरे हो, जग की परवाह नहीं...
दुःख में न बहे आँसू, सुख की कोई चाह नहीं...
तेरी सेवा में बीते, उस पल को ही पल माना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...
दुनिया ये छलावा है, कही तुम भी न छल जाना...
बदले दुनिया लेकिन, तुम भी न बदल जाना...



!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!

!! दर्दी जिगर पे क्यूँ कर, नस्तर चला रहे हो... !!


हे! प्रिय श्यामसुन्दर, हे प्रिय मनमोहन, हे प्रिय वंशीधर आज अपने सभी प्रेमियों को आखिर ये तो बता ही दो, कि अधरों पे ये जादुगारी वंशी धर किसको सुना रहे हो, और इन नयन कमलों के चितवन को नीचे कर किससे नजर चुराते हुए, इस वंशी की मधुर तान से किसे लुभा रहे हो...




अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...
अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...
इतना बता दे मोहन, किसको लुभा रहे हो...
इतना बता दे कान्हा, किसको लुभा रहे हो...



बनकर तेरा दीवाना, तेरी याद में विचरता...
तेरे लिए कन्हैया, ये दिल मेरा धड़कता...
अच्छा नहीं जो प्यारे, नजरें चुरा रहे हो...
अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...



हे मनमोहन...



एक बात पूछता हूँ, क्या मैं भी तुमको भाता...
गर प्रेम हो बराबर, फिर क्यूँ मुझे सताता...
इतना ही कह दे मुझको, क्यूँ जुल्म ढा रहे हो...
इतना बता दो मोहन, किसको लुभा रहे हो...



क्या तुम्हे पता भी है, कि...



नजदीक जो तू होता, आँसू मैं क्यूँ बहाता...
साये में तेरे मोहन, खुद को ही भूल जाता...
दर्दी जिगर पे क्यूँ कर, नस्तर चला रहे हो...
अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...



अरे! प्यारे...



तेरा रूप है निराला, तेरी शान है निराली...
ये बागवाँ है तेरा, और तू ही इसका माली...
'नंदू' दया दिखा दे, क्यूँ भाव खा रहे हो....
इतना बता दो मोहन, किसको लुभा रहे हो...



अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...
अधरों पे धर के वंशी, किसको सुना रहे हो...
इतना बता दे मोहन, किसको लुभा रहे हो...
इतना बता दे कान्हा, किसको लुभा रहे हो...



आप सभी इस सुमधुर भाव की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गयी लिंक पर क्लीक कर सुन सकते है...



!! जय हो प्रिय श्यामसुन्दर की !!
!! जय हो प्रिय मनमोहन की !!
!! जय हो प्रिय वंशीधर की !!



भाव के रचियता : "श्री नंदू जी"



Tuesday, July 12, 2011

!! तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते... !!



मेरा स्वयं का ऐसा मानना है, कि दुःखदायी परिस्थिति प्रभु के विधान से हमारे कल्याण के लिए ही आती है... अतः उसे हमें मिटाने की चेष्टा में तत्परता न दिखाते हुए शांतिपूर्वक भगवत भजन करते हुए सह लेना चाहिए... माता कुंती ने भी एक बार श्री कृष्ण से करवद्ध हो वरदान मांगते हुए यह कहा था, कि "हे कृष्ण, दे सकते हो तो मुझे सदा दुःख देना, ताकि इस संसार की आसक्ति को छोड़, तुममें हमारी आसक्ति सदैव बनी रहे, सुख दोगे तो हो सकता है, संभवतः हमे तुम्हे भूल भी जाये..."


इस संसार में आसक्ति की गलती में लिप्त, जब कभी भी हमें किसी सांसारिक दुःखदायी परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, तो स्वभावतः हमारा मन भी व्याकुल हो उठता है, और अपने आप को हारा हुआ सा महसूस करने लगता है... परन्तु प्रभु में सच्ची श्रद्धा होने के कारण उस मन को समझने में देर नहीं लगती कि यह परिस्थिति भी प्रभु के विधान से हमारे कल्याण के लिए है, तो वह मन अपने इष्ट और अपने प्रभु से अपने आप को सबल बनाने, अंतर्मन में निहित समस्त दोषों को दूर करने एवं प्रभु के श्री चरणों के प्रति विश्वास को और दृढ करने हेतु इस प्रकार निश्चल ह्रदय से करवद्ध हो प्रार्थना करने लगता है...





तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...
तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



नादानी जी को जलाये, व्याकुलता बढ़ती जाये...
बैरी मोहन मन मेरा, मुझे क्या क्या रंग दिखाये...
रंगो के रंगमहल मे, हमे नित नये सपने आते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



प्रभु निश्चय अटल बना दे, विश्वास का रंग चढा दे...
गुण गाऊंगा मै तेरा, मेरे सारे दोष मिटा दे...
निर्बलता से मै हारा, मुझे क्यो न सबल बनाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



प्रभु हार गया अब आओ, मुझे आकार सबल बनाओ...
दामन असुवन से भींगा, 'नंदू' यु न अजमाओ...
है शरम प्रभु हमें खुद पर, हम फिर भी चलते जाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते..
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते..
तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!


भजन : "श्री नंदू जी'

!! जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा... !!


भगवन्नाम की महिमा अमित है... अपने प्रिय का नाम जपते-जपते प्रेमी का मन अनेक प्रकार की भाव-तरंगों से अनुप्राणित हो उठता है... ऐसी ही एक भाव तरंग से परिपूर्ण एक प्रेमी का ह्रदय, अश्रुपूरित नेत्रो से अपने आराध्य के समक्ष करुण स्वर में यु कहता है...



हे! मेरे प्रिय श्यामसुन्दर, हे! मेरे मोहन...



जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...



ये जीवन समर्पित, चरण में तुम्हारे...
तुम्हीं मेरे सर्वश्व, तुम्ही प्राण प्यारे...
तुम्हे छोड़ कर नाथ, किससे कहूँगा...
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...



जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...



ना कोई उलाहना, ना कोई अरजी...
कर लो करा लो जो, है तेरी मरजी...
कहना भी होगा तो, मैं तुझसे कहूँगा...
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...



जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...



दयानाथ दयनीय, मेरी अवस्था...
तेरे हाथों अब मेरी सारी व्यवस्था...
जो भी कहोगे तुम, वहीं मैं करूँगा...
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...



जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...
जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा...



!! जय हो श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो श्री श्यामसुन्दर जी की !!

!! आइये हारकर, जाइये जीतकर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये... !!


वास्तव में मनुष्य जन्म ही सब जन्मो से सर्वोत्तम माना गया है, क्योकि प्रभु की कृपा से प्राप्त इस जीवन में ही मनुष्य श्री भगवान का शरणागत हो भगवद भजन कर प्रभु को प्राप्त कर सकता है... मनुष्य नाम उसी का है, जो प्रभु प्राप्ति का जन्म-जात अधिकारी हो... आइये हम सब भी उन्ही प्रभु की शरण में अपने शीश झुकाते हुये चले आये और अपने इस जीवन धन को धन्य करे...




साँवरे का ये दर, है बड़ा नामगर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
साँवरे का ये दर, है बड़ा नामगर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...



जिनके दिल में कन्हैया की तस्वीर है, उनसे रूठी कभी भी ना तकदीर है...
जिनके दिल में कन्हैया की तस्वीर है, उनसे रूठी कभी भी ना तकदीर है...
साथ ये है अगर, क्यूँ करे हम फिकर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...



इनके जैसा जहान में ना दूजा कोई, विष को अमृत बनाते है पल में यही...
इनके जैसा जहान में ना दूजा कोई, विष को अमृत बनाते है पल में यही...
आइये हारकर, जाइये जीतकर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
साँवरे का ये दर, है बड़ा नामगर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...



सबसे रिश्ता निभाया है 'संजू' यहाँ, श्याम से भी तो रिश्ता निभा लीजिए...
श्याम कृपा से पाया है मानव जनम, कुछ समय तो शरण में बिता लीजिए...
बीती जाये उमर, फिर भी हैं बेखबर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...



साँवरे का ये दर, है बड़ा नामगर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
साँवरे का ये दर, है बड़ा नामगर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...
पड़ गयी गर नजर, जाइयेगा संवर, सिर झुकाये हुये बस चले आइये...



आप सभी इस सुन्दर भाव को नीचे दी गयी लिंक पर क्लीक कर सुन भी सकते है...


!! जय हो साँवरे सलोने प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो साँवरे सलोने प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो साँवरे सलोने प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!


यह भाव "जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा, नहीं कोई जाना नहीं" गीत के तर्ज़ पर आधारित है...
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