!! ॐ !!


Friday, December 31, 2010

!! मेरा एक साथी है, बड़ा ही भोला भाला है... !!




आइये आज आप सभी को मैं, अपने एक भोले भाले एवं इस जग से निराले एक साथी से रूबरू कराता चलू...


मेरा एक साथी है, बड़ा ही भोला भाला है...
मिले ना उस जैसा, वो जग से निराला है...
जब जब दिल ये, उदास होता है...
मेरा मुरली वाला, मेरे पास होता है...



जब तक रहा अकेला, बड़ा दुःख पाया मैं...
जब जब दुःख ने घेरा, बड़ा घबराया मैं...
इस सारी दुनिया में, कन्हैया का सहारा है...
मिले ना उस जैसा, वो जग से निराला है...



जब जब दिल ये, उदास होता है...
मेरा मुरली वाला, मेरे पास होता है...



नयी नयी पहचान, बदल गयी रिश्ते में...
'बनवारी' मेरा सौदा, पट गया सस्ते में...
गिरा में जब जब भी, उसी ने संभाला है...
मिले ना उस जैसा, वो जग से निराला है...



जब जब दिल ये, उदास होता है...
मेरा मुरली वाला, मेरे पास होता है...



मेरा एक साथी है, बड़ा ही भोला भाला है...
मिले ना उस जैसा वो जग से निराला है...
जब जब दिल ये उदास होता है...
मेरा मुरली वाला मेरे पास होता है...



!! जय जय हो प्रिय श्यामसुन्दर की !!
!! जय जय हो प्रिय श्यामसुन्दर की !!

भाव प्रस्तुति : "श्री जय शंकर जी"

Thursday, December 30, 2010

!! एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये... !!



प्यारे साँवरा श्यामसुन्दर की प्रेम की नजर जिस किसी पर भी पड़ती है, तो वो निहाल हो जाता है... इसलिए प्रभु के श्री दर्शन की आस लिये एक प्रेमी का हृदय प्रेम भावना से वशीभूत हो, श्री श्यामसुन्दर से अपनी हृदय की भावनाओं की अभिव्यक्ति इस प्रकार करता है...




एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...
नजरे मिला के श्याम जरा मुस्कराइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...
नजरे मिला के श्याम जरा मुस्कराइये...



नजरे हमारी आपकी, चौखट पे है लगी...
कबसे निहारे राह, बिचारी खड़ी खड़ी...
नजरों पर कर रहम, इन्हें अब ना सताइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...



ये जानकर भी आप यही आस पास है...
फिर भी समझ ना आये, यह दिल क्यों उदास है...
जज़्बात दिल के जान जरा पास आइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...



दिल को तो हमने आपके, चरणों में रख दिया...
दुनिया हमारी आप है, इतना समझ लिया...
अब आप आपने हाथ से इसे सजाइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...



प्रहलाद सा बनू प्रभु, हनुमत से भक्ति हो...
गाऊं भजन में झूम के, मीरा सी मस्ती हो...
'नंदू' कहे इसे तो अपने, गले लगाइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...



एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...
नजरे मिला के श्याम जरा मुस्कराइये...
एक बार हमसे साँवरे, नजरे मिलाइये...
नजरे मिला के श्याम जरा मुस्कराइये...



!! जय जय श्री साँवरा श्यामसुन्दर जी !!
!! जय जय श्री साँवरा श्यामसुन्दर जी !!


भजन : "श्री नंदू जी"

!! आजा कलयुग में भी लेके अवतार ओ गोविन्द... !!



हे! प्यारे गोविन्द... हे! प्यारे श्यामसुन्दर... बस अब तो एक भरोसा तेरा ही है... इस घोर कलयुग में तेरी यह सृष्टि पूर्ण रूप से त्रस्त हो रही है... क्यूँ न तुम इस कलयुग में पुनः अवतार धारण कर इस पृथ्वी के उद्धार हेतु आ जाते... निज भक्तो की करुण पुकार सुनने वाले भगवन, तुम स्वयं देख लो, अपने निज स्वार्थ की पूर्ति हेतु स्वयं मानव द्वारा ही उपेक्षित तुम्हारी यमुना, तुम्हारी  गैयो का कितना बुरा हाल है... हे! गोविन्द, अब तो देर ना करो, अब तो आ जाओ पुनः अपनी यमुना के बीच पुनः अपनी गैयो के बीच... 




ओ आजा कलयुग में भी लेके अवतार ओ गोविन्द...
अपने भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...



यमुना का पानी तोसे करता सवाल है...
तेरा बिना देख जरा कैसा बुरा हाल है...
काहे तुने छोड़ा संसार ओ गोविन्द...
अपने भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...



निकला है सवा मण सोना जहाँ कूप से...
गायें बिचारी मरे चारे बिना भूख से...
गैया को दिया दुत्कार ओ गोविन्द...
तेरे भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...



घर घर में माखन की जगह अब शराब है...
कलयुग की गोपियाँ तो बहुत ही ख़राब है...
धरम तो बन गया व्यापार ओ गोविन्द...
अपने भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...



अब किसी द्रौपदी की बचती न लाज रे...
बिगड़ा जमाना भये उलटे सब काज रे...
कंसो की बनी सरकार ओ गोविन्द...
अपन भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...



ओ आजा कलयुग में भी लेके अवतार ओ गोविन्द...
अपने भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...
ओ आजा कलयुग में भी लेके अवतार ओ गोविन्द...
अपने भक्तो की सुनले पुकार ओ गोविन्द...


Wednesday, December 29, 2010

!! जिनकी नजरो में श्याम नज़रबंद है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद है...!!






वास्तव में सही कहा गया है कि, भगवान और भक्त का संबंध सैदव से ही आनंदवर्धन एवं परम शांतिदायक होता है... यदि हम पूर्ण रूप से आपने प्रभु को समर्पित हो जाये तो हमें उसे याद करने की आवश्यकता नहीं, वे स्वयं निज भक्तो का ध्यान रखते है...


भगवान सैदव भक्तों के वश में रहते है, भीषण तपस्या करने वाले को भगवान के दर्शन सुगमता से नहीं होते परन्तु निश्छल मन से जब एक "निर्धन जाट" ने पुकारा तो एक हाली बनकर उसका खेत जोत आये...एक अबोध बालक जंगल पार करने में डर रहा था तो "श्याम भईया" बनकर उसे जंगल पार करा गए... इसलिए हमें भी एक मात्र अपना संबंध आपने प्रभु से ही जोड़ लेना चाहिये... इसलिए तो कहते है...



श्याम प्यारे से जिनका संबंध हैं, उनके चित्त में आनंद ही आनंद हैं...
मेरे सांवरे से जिनका संबंध है, उनके घर में आनंद ही आनंद है...



डोर जीवन की सौंप दे तू श्याम को...
श्याम कर देगा तेरे हर काम को...
इनके हाथो में जिसका प्रबंध है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद है...
मेरे सांवरे से जिनका संबंध है, उनके घर में आनंद ही आनंद है...



रिश्ता जिनका प्रभु श्याम से हो जायेगा...
वो ज़िन्दगी में अभय दान पायेगा...
जिनकी नजरो में श्याम नज़रबंद है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद है...
श्याम प्यारे से जिनका संबंध हैं, उनके घर में आनंद ही आनंद हैं...



इनको दिल में बसा, दुःख सारे कट जायेंगे...
ज़िन्दगी के पाप, सारे कट जायेंगे...
छायी कण-कण में इनकी सुगंध है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद हैं...
मेरे सांवरे से जिनका संबंध हैं, उनके घर में आनंद ही आनंद हैं...



"मात्रदत्त" श्यामसुन्दर से जोड़ो लगन...
काट तो ज़िन्दगी, श्याम में हो मगन...
जिनको आया ये सांवरा पसंद है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद है...
श्याम प्यारे से जिनका संबंध हैं, उनके घर में आनंद ही आनंद हैं...



मेरे सांवरे से जिनका संबंध है, उनके चित्त में आनंद ही आनंद है...
श्याम प्यारे से जिनका संबंध हैं, उनके घर में आनंद ही आनंद हैं...
भाव के रचियता : "श्री श्री मात्रदत्त जी"

Sunday, December 26, 2010

!! ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भर छाछ पे नाच नचावेँ... !!








आज हमारे प्यारे छोटे से श्यामसुन्दर बाल ग्वालो की टोलियो के संग माखन चुराने चल पड़े है... सभी ग्वाल बाल जब एक गोपी के घर में माखन चुराने पहुंचे, तब सहसा उनकी नजर ऊपर लटकी हुई माखन की मटकी के छींको पर पड़ी... उन माखन की मटकी के छींको तक पहुचने के लिये सभी ग्वाल बाल ने मिल कर छोटे से कन्हैया को अपने कंधो पर उठा लिया.. और ...कन्हैया अपने छोटे छोटे हाथो से माखन निकालते हुए अपनी छोटी छोटी बैया से सभी ग्वाल बालो को खिलाने लगे... माखन की इस लुट को देख वहाँ कुछ बन्दर और बंदरिया भी माखन के स्वाद का आनद लेने पहुँच गए... और जब इस लुट की आवाजों से नींद में सोयी हुई गोपी सहसा जाग पड़ी तो, वे इस प्रकार चिल्लाती हुई दौड पड़ी कन्हैया और सभी ग्वालो की टोली को पकड़ने के लिये...




फोड़ दियो मटकी रे, चुराने म माखन कन्हाई रे...
जागो रे जागो, जागो रे जागो....
आयो रे माखन चोर, जागो रे जागो, जागो रे जागो...]



मटकी पर मटकी, छींका पर लटकी, छोटो कन्हाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो..



निकल्यो कन्हाई, सब ने सताने...
वाला क संग मैं माखन चुराने, आफत है आई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



ग्वाला प ग्वाला, ऊपर कन्हाई...
लिपटायो मुख म माखन मलाई, छोटी कलाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



जागी गुजरिया, देखी मटकिया...
ग्वाल-बाल संग बन्दर-बंदरिया, दौड़ लगाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



पकड़ो रे पकड़ो, मच गयो शोर...
आयो ह आज कोइ माखन चोर, रात जगाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



आयो पकड़ म, छोटो सो बालो...
देखी तो बोली नन्द को लालो, यशुमती जाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



बांधी कलैया, मिलकर गुजरिया...
ल्याई पकड़ तेरो लालो म्हें मैया, कठे कन्हाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...



तेरो ह ढोलो, नहीं मेरो लालो...
प्रभु स पड़ गयो 'टीकम' जी पालो, लीला दिखाई रे...
चुराने म माखन कन्हाई रे, जागो रे जागो, जागो रे जागो...
 



प्रिय प्रभु प्रेमियों... इनकी लीलाये तो अपरम्पार है... माखन की चोरी में जब कभी ये छोटे से श्यामसुन्दर गोपियों द्वारा पकड़ लिये जाते तो वे गोपियाँ छोटे से कन्हैया से यूँ कहती-





एक गोपी सुशीला ने कहा :  "क्यों रे कनुआ... आज आये हो पकड़ में...... तेरी मैया तो हमारी बात का विश्वास नहीं करती... आज तुम्हे रंगे हाथो पकड़ा हैं... चल अब तुम्हे तुम्हारी मैया के पास ले चलती है... वो कहती है, मेरे लल्ला के घर में क्या माखन की कमी हैं, जो वो तेरे घर में माखन चोरी करने जायेगा...."



यह सुन नटखट श्यामसुंदर को एकाएक कुछ उत्तर न सुझा और कहने लेगे : " वो मैं....वो मैं...."



दूसरी गोपी सकुन्तला ने उनकी बात को बीच में ही काटते हुए कहा : "अच्छा मेरी कुशलक्षेम पूछने आये थे... मैं तो ठीक हूँ... अच्छा यह बताओ माखन खाओगे...."



नटखट श्यामसुंदर ने कहा : "हाँ काकी, दो न माखन... और ठंडी ठंडी छाछ भी देना... बहुत प्यास लग रही हैं..."




सुशीला ने कहा : "हमारी एक शर्त हैं....तुम हम सभी को चुम्बन दोगे और हमारे साथ नृत्य करोगे तभी माखन देंगी..."



नटखट श्यामसुंदर ने जब सुशीला के इन वचनों को सुना तो लज्जा से आँखों को नीचे झुका इस प्रकार कहने लगे : "काकी, मुझे लाज आती है..."



एक गोपी संगीता ने कहा : "ओ ओह... लाज आती है... माखन चोरी करते हुए लाज नहीं आती तुम्हे..."



नटखट श्यामसुंदर ने सोचा, अब इनके चुंगल में फंस गया हूँ, अब कोई चारा नहीं, ये जैसे बोलेंगी., मुझे वैसे ही करना पड़ेगा...



ऐसा सोच उन्होंने इसप्रकार कहा : "ठीक है !! होले होले लेना.....और एक एक करके लेना... मेरे गाल बहुत ही कोमल हैं, छिल न जाये... "



तत्पश्चात समस्त ग्वालिनो ने उनका एक एक करके वास्तल्य भाव के साथ उनका चुम्बन लिया.....वास्तव में वे गोपियाँ तो श्री श्यामसुंदर की इन लीलाओ का आनंद उठाना चाहती थी... मैया यशोदा के पास उनकी शिकायत करना तो बस एक बहाना मात्र था...



जब सभी ने एक एक कर चुम्बन ले लिया अब नटखट श्यामसुंदर इस प्रकार कहने लगे : " अच्छा अब मुझे छाछ पिलाओ और माखन खिलाओ..."



इसपर गोपी सुशीला ने उनको छाछ पिलाई और माखन भी खिलाया...



तत्पश्चात एक गोपी सुमित्रा ने कहा : "अरे ओ कान्हा... मैने सुना है कि, तुझे बहुत ही सुन्दर नृत्य करने आता है.....आज हमे भी अपना नृत्य दिखाओ न... फिर हम तुम्हे और भी छाछ देंगी और ढ़ेर सारा माखन भी देंगी.... "



बिचारे छोटे से नटखट श्यामसुंदर उन ग्वालिनो के चुंगल में अच्छे से फंस चुके थे...



ऐसा सुन नटखट श्यामसुंदर ने मन ही मन कुछ सोच कर कहा : "हाँ आता तो है....परन्तु नृत्य करने के बाद मेरी कमर लचक जाती हैं... ठीक है, अगर तुम लोग इतनी प्रार्थना कर रही हो तो थोड़ी देर नृत्य कर लूँगा....परन्तु तुम लोग भी मेरे साथ नृत्य करना..."



ऐसा कह सभी ग्वालिने नटखट श्यामसुंदर के साथ नृत्य करने लगी.... श्यामसुंदर उनके बीच में थे और वे सभी उनके चारो और गोलाकार चकरी बनाकर नृत्य करें लगी...



नृत्य के बीच में ही नटखट श्यामसुंदर ने कहा : " मैं थक गया हूँ , थोरी सी छाछ पिला दो "



यह सुन सुशीला ने उनको छाछ पिलाया और वे सभी फिर से नृत्य करने में मग्न हो गए.....


 
ब्रज के रसिक कवि श्री रसखान जी ने प्रभु की इस अनुपम लीला पर बहुत ही सुन्दर पद लिखा है...



सेस, गनेस, दिनेस, महेस, सुरेसहु जाके निरंतर ध्यावेँ...
आदि अनादि अनंत अखंड, अभेद अछेद सुवेद बतावेँ...
नारद से सुनि व्यास थके, पचि हारि गए तहोँ भेद न पावेँ...
ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भर छाछ पे नाच नचावेँ...



लाय समाधि रहे ब्रम्हादिक, जोगी भये पर अंत न पावेँ...
साँझ ते भोरहिँ भोर ते सांझहि, सेस सदा नित नाम जपावैँ...
ढूँढे फिरै तिरलोक में साख ,सुनारद ले कर बिन बजावैँ...
ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भर छाछ पे नाच नचावेँ...



गूँज गरे सिर मोरपखा अरु, चाल गयंद की मो मन भावै...
साँवरो नंदकुमार सबै, ब्रज मंडली में ब्रजराज कहावै...
साज़ समाज सबै सिरताज, ओ लाज की बात नहीं कही आवै...
ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भर छाछ पे नाच नचावेँ...



!! जय जय कृष्ण कन्हैया लाल की !!

Thursday, December 23, 2010

!! तेरी नजर से दिल मेरा घायल है, मुझे मरहम लगाता क्यूँ नहीं..? !!


ओ प्यारे श्यामसुन्दर त्तेरी एक झलक को तरसता तेरा ये प्रेमी तुझसे कहता है क्या...



श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
ओ प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?
ओ श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
ओ प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?



मेरा दिल तो दीवाना हो गया...
मेरा दिल तो दीवाना हो गया...
ओ मेरा दिल तो दीवाना हो गया...
मुझे दिल से लगता क्यूँ नहीं..?



ओ श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?



सदियों से भटक रहा दर बदर...
सदियों से भटक रहा दर बदर...
ओ सदियों से भटक रहा दर बदर...
मुझे दर पर बुलाता क्यूँ नहीं..?



ओ श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?



तेरी नजर से दिल मेरा घायल है...
तेरी नजर से दिल मेरा घायल है...
ओ तेरी नजर से दिल मेरा घायल है...
मुझे मरहम लगाता क्यूँ नहीं..?



ओ श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?



तेरे प्यार का आधा पागल हूँ...
तेरे प्यार का आधा पागल हूँ...
ओ तेरे प्यार का आधा पागल हूँ...
पूरा पागल बनाता क्यूँ नहीं..?



श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?
ओ श्याम झलक अपनी दिखाता क्यूँ नहीं..?
प्यारी सूरत दिखाता क्यूँ नहीं..?

Monday, December 20, 2010

!! सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो... !!



कहते है प्रभु अपने निज प्रेमी को किसी न किसी माध्यम से अपने श्री दर्शन जरुर करवाते है... और जब कोई साँवरा श्यामसुन्दर का प्रेमी, उनसे मिलन की चाह लिये रात्रि की शांत एवं मधुर बेला में अपने साँवरे का स्मरण करता हुआ शयन करता है तो, प्रभु अनायास ही स्वप्न के माध्यम से उस प्रेमी के सामने प्रकट हो जाते है... इस अंतराल में जब सहसा उसकी नींद टूटती है तो, वह प्रेमी उठ कर इस प्रकार से अपने हृदय के भावो की अभिव्यक्ति करता है...




सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...
सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



नींद म सुतो थो मैं, आयो साँवरियो, म्हाने जगायों, ओ म्हाने जगायों...
नींद म सुतो थो मैं, आयो साँवरियो, म्हाने जगायों, ओ म्हाने जगायों...
म्हारी बैया पकड़ ली ह माय रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



पहल पहल मैं, घणों घबड़ायो, समझ न पायो, ओ समझ न पायो...
पहल पहल मैं, घणों घबड़ायो, समझ न पायो, ओ समझ न पायो...
पाछे समझ म आई सारी बात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



साँवरियो ह म्हारो, प्राण पियारो, हिवड़े सु प्यारो, ओ हिवड़े सु प्यारो...
साँवरियो ह म्हारो, प्राण पियारो, हिवड़े सु प्यारो, ओ हिवड़े सु प्यारो...
मैं तो चल्यो रे सांवरिया के साथ रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...
सूपणों जगायो आधी रात रे, आयो सांवरो...
सांवरो बुलावे रे, नींद कोणी आवे...



!! जय जय म्हारा साँवरा श्यामसुन्दर !!
!! जय जय म्हारा साँवरा श्यामसुन्दर !!
!! जय जय म्हारा साँवरा श्यामसुन्दर !!

Sunday, December 19, 2010

!! करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है... !!
































हे! सम्पूर्ण जगत के पालनहार श्री श्यामसुन्दर तेरे इस जगत के तरह तरह के निराले रंग-ढंग देखकर मेरा हृदय बहुत ही हतप्रभ है, अत: व्यकुलतावश ये बार बार आपके श्री चरणों में यही प्रार्थना करता हैं कि...




जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी हैं...
जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी हैं...
करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



प्यारे! तेरा दीदार ही क्यों काफी है?
तुम्ही मेरी निगाहों की जुफ्तज़ु हो, तुम्ही मेरे खयालों का मुद्आ हो...
तुम्ही मेरे सनम हो, तुम्ही मेरे खुदा हो...


इसलिए,


जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी हैं...
हे गोविन्द! तेरा दीदार काफी हैं...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



नहीं चाहिये ये दुनिया के, निराले रंग ढंग मुझको...
नहीं चाहिये ये दुनिया के, निराले रंग ढंग मुझको...
चला जाऊं मैं वृन्दावन, तेरा दरबार काफी हैं...
चला जाऊं मैं वृन्दावन, तेरा दरबार काफी हैं...
हे गोविन्द! तेरा दरबार काफी है...



करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



जगत के साजे बाजो से, हुए है कान अब बहरे...
जगत के साजे बाजो से, हुए है कान अब बहरे...
कहाँ जाके सुनु अनहद, तेरी झंकार काफी हैं...
कहाँ जाके सुनु अनहद, तेरी झंकार काफी हैं...
हे गोविन्द! तेरी झंकार काफी हैं...



करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का...
जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का...
तेरे भक्तो से हो प्रीति, तेरा परिवार काफी है...
तेरे भक्तो से हो प्रीति, तेरा परिवार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा परिवार काफी है...



करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



जगत की झूठी रोशनी से, है आँखे भर गयी मेरी...
जगत की झूठी रोशनी से, है आँखे भर गयी मेरी...
मेरी आँखों में हो हरदम, तेरा चमकार काफी है...
मेरी आँखों में हो हरदम, तेरा चमकार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा चमकार काफी है...



प्यारे ! तेरा चमकार क्यूँ काफी हैं...?
सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी...
तुम आओगे इस दिन की तो क्या बात बनेगी...


इसलिए,


मेरी आँखों में हो हरदम, तेरा चमकार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा चमकार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी हैं...
जगत के रंग क्या देखूँ, तेरा दीदार काफी हैं...
करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
करूँ मैं प्यार किस-किस से, तेरा एक प्यार काफी है...
हे गोविन्द! तेरा एक प्यार काफी है...



हे! मुरलीधरा, मनमोहना.......हे! नंदनंदना हे राधामाधवा.....
हे! मुरलीधरा, मनमोहना.......हे! नंदनंदना हे राधामाधवा.....



श्री भगवान् के प्रति, श्री विनोद जी अग्रवाल द्वारा गाये गए  इस अतिसुन्दर भाव को आप सभी इस लिंक पर क्लिक कर सुन सकते है...




!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!

Friday, December 17, 2010

!! ओ टेढ़ी नजरों के तीर चलाये जा...!!



ओ मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे, टेढ़ी-टेढ़ी चित्तवन वारे, टेढ़ी लकुटी कमरिया वारे, ओ टेढ़ी नजरों से तीर चलाकर मुझे घायल करने वारे... मुझे निज नजरों से घायल कर अब क्यों नैन चुरा रहे हो... और बैठे-बैठे अधरन पर मुरली लगा कर मुस्करा रहे हो...


हाय रे बेदर्दी!!! तुझे जरा सा दरद भी नहीं होता, क्यों जले पर नोन छिडकते हो...? अरे! अपने इस प्रेमी के चित्त को चुराने वारे चित्तचोर सांवरिया, प्रीत की रीत निभाने के लिए आजा न एक बार... अपना चंदा सा मुखड़ा दिखा जा न... और मेरे इन नयनों के बीच समां जा न...प्रेम सुधा रस बरसा जा न एक बार...




ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...



ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 

तौ बिन मोहन चैन पड़े न, तौ बिन मोहन चैन पड़े न...
नयनों से उलझाये नयना, नयनों से उलझाये नयना...
ओ मेरी अंखियन बीच समाये जा...
अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 


बेदर्दी तोहे दर्द न आवे, बेदर्दी तोहे दर्द न आवे...
काहे जले पे नोन लगावे, काहे जले पे नोन लगावे...
ओ आजा प्रीत की रीत निभाये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 

 
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 


बांसुरी अधरन धर मुस्कावे, बांसुरी अधरन धर मुस्कावे...
घायल कर क्यूँ नैन चुरावे, घायल कर क्यूँ नैन चुरावे...
ओ आजा श्याम पिया आये जा आये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
काहे तौं संग प्रीत लगाई, काहे तौं संग प्रीत लगाई...
निष्ठुर निकला तू हरजाई, निष्ठुर निकला तू हरजाई...
ओ लागा प्रीत का रोग मिटाये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 


हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 


टेढ़ी तेरी लकुटी कमरिया, टेढ़ी तेरी लकुटी कमरिया...
टेढो तू चित्त चोर सांवरिया, टेढो तू चित्त चोर सांवरिया...
ओ टेढ़ी नजरों के तीर चलाये जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
काँधे पे तोरे कारी कमरिया, काँधे पे तोरे कारी कमरिया
अलके है जैसे कारी बदरिया, अलके है जैसे कारी बदरिया
ओ कान्हा प्रेम सुधा बरसाए जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...
 


हय! मोर मुकुट वारे, घूंघराली लट वारे...
ओ टेढ़ी नजरों के तीर चलाये जा...
ओ कान्हा प्रेम सुधा बरसाए जा...
ओ अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा...

 
 
!! मोर मुकुट वारे की जय !!
!! घूंघराली लट वारे की जय !!
!! टेढ़ी-टेढ़ी चित्तवन वारे की जय !!
!! टेढ़ी लकुटी कमरिया वारे की जय !!

Thursday, December 16, 2010

!! दिल ये मेरा सांवरे अब तेरा हो गया... !!





सांवरे सलोने श्री श्यामसुन्दर की यह अनुपम सूरत प्रेमभाव से पूरित हर कोमल चित्त को अनायास ही अपनी ओर ऐसी आकर्षित करती है कि, उस कोमल चित्त को यह भी भान नहीं होता कि, उसके उस कोमल चित्त का हरण सांवारिये श्यामसुन्दर ने कर लिया... परन्तु जब उस कोमल चित्त को यह आभाष होता है कि, उसका हरण हो गया है तो वो श्री श्यामसुन्दर से इस प्रकार अपने भावो अभिव्यक्ति करता है...



"सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया"
"सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया"



दिल ये मेरा सांवरे अब तेरा हो गया...
देखते ही देखते सवेरा हो गया...
मुझे बांके सांवरिया से प्यार हो गया...
ओ प्यारे सांवरिया से प्यार हो गया...



सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...
दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया, दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया...



ब्रजमंडल की भूमि प्यारी...
बसते जहां श्री कुंज बिहारी...
मुझे बांके सांवारिये का साथ हो गया...
ओ प्यारे सांवरिये का साथ हो गया...



सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...
दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया, दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया...



कृष्ण कन्हैया राधा प्यारी...
युगल छवि पर जाऊं बलिहारी...
मुझे बांके संवारिये ने मोल ले लिया...
ओ प्यारे संवारिये ने मोल ले लिया...



सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...
दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया, दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया...



जब से श्याम सजन मोहे भायो...
रोम-रोम पुलकित हर्षायो...
'नंदू' बांके संवारिये ने दर्द हर लिया...
ओ प्यारे संवारिये ने मोल ले लिया...



सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...
दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया, दिल ये मेरा सांवरे तेरा हो गया...
सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...
सांवरे सलोने तेरी सूरत जो देखी मेरा दिल खो गया...



!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!
!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!

भाव की प्रस्तुति : 'श्रद्धेय श्री नंदू जी"

!! दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं... !!


ओ प्यारे श्यामसुन्दर...

दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं...
रहते हम तो मस्ती में, तेरे करीब हैं...
दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं...


हम न होते फ़कीर गर, तू कैसे दातार...
तुम तो मालिक हो मेरे, मैं हूँ ताबेदार...
बगिया रहती हरी भरी, मेरे नसीब है...
दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं...


दर तेरे हम आते हैं, मिलता तेरा दीदार...
परवाह नहीं किसी की, तुमसा पा करतार...
दानी तुमसा मिल गया, मेरे नसीब है...
दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं...


रखना अपनी तुम महर, तेरा हूँ कर्ज़दार...
कर्जा चुका न पाउँगा, तेरा मैं सरकार...
'टीकम' खुशनसीब मैं, रहना फ़कीर है...
दुनियाँ तेरी कहती है, हम तो फ़कीर हैं...


!! श्री श्यामसुन्दर जी की सैदव जय हो !!
!! श्री श्याम बाबा जी की सैदव जय हो !!

प्रस्तुति : "श्री महाबीर जी सराफ"

Monday, December 13, 2010

!! प्रेम का अमृत पान करे है, मोहन रसीला...!!


आहा!!!... अनुपम रूप मेरो नीलमणि, नीलवरण, सांवरो श्यामसुन्दर को...




मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...
श्याम रंगीला, रंग है नीला, छैल छबीला...मेरे सांवरे का...



नीलवरण है रूप नीलाम्बर, घुँघरवाला केश रे..
मोर मुकुट माथे प विराजे, राज कुँवर सा वेश रे...
पीली पीताम्बर, केशरी फटका, कुर्ता है पीला..मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



मुरलीधर घनश्याम कन्हैया, गिरधारी मतवाला रे...
चंचल, चतुर, चालाक, साँवरा, लगता भोला भाला रे..
बड़ा रंगीला कृष्ण कन्हैया, मन का है ढीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



कानो में कुण्डल पहने, सोहे वैजयंती माला रे..
वन उपवन में गैया चराये, वंशी बजाये मतवाला रे...
प्रेम का अमृत पान करे है, मोहन रसीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



कहते है तेरे भगत मुरारी, अपने रंग में रंग ले रे...
आओ प्रभु जी दरस दिखाने, राधा रुक्मण संग ले रे...
हम भी तेरे दर आयेंगे, देखने रूप सजीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...
श्याम रंगीला, रंग है नीला, छैल छबीला...मेरे सांवरे का...


!! जय हो नीलमणि, नीलवरण, सांवरा श्यामसुन्दर जी की !!

Saturday, December 11, 2010

!! राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे... !!




श्री राधारानी जी, श्री कृष्ण की परम आह्लादिनी शक्ति हैं... और ऐसा हम सभी जानते है, बिना श्री राधे रानी की कृपा से हम श्री कृष्ण के दर्शन की इच्छा मात्र भी व्यक्त नहीं कर सकते... स्वयं श्री कृष्ण आनन्दरूपी चन्द्रमा हैं और श्री राधेरानी जी उनका प्रकाश है... श्री कृष्ण जी लक्ष्मी को मोहित करते हैं परन्तु श्री राधा रानी जी अपनी सौन्दर्य सुषमा से उन श्री कृष्ण को भी मोहित करती हैं...



परम प्रिय श्री राधा नाम की महिमा का स्वयं श्री कृष्ण ने इस प्रकार गान किया है-"जिस समय मैं किसी के मुख से ’रा’ अक्षर सुन लेता हूँ, उसी समय उसे अपना उत्तम भक्ति-प्रेम प्रदान कर देता हूँ और ’धा’ शब्द का उच्चारण करने पर तो मैं प्रियतमा श्री राधा का नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे-पीछे चल देता हूँ"



सो, हम सभी कृष्ण प्रेमियों का एक मात्र आश्रय श्री राधा रानी जी ही है, तो आइये हम भी श्री राधा रानी जी से इन मधुर भावो के साथ विनती करते है...





राधे ओ राधे, राधे ओ राधे...
कान्हा रूठा, दिल टुटा...
अब तू ही आसरा दे...
मुझे श्याम से मिला दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



सुनता हूँ मेरे कान्हा, तेरे दिल में है समाये..
राधे को जो आराधे, उसे श्याम स्वयं मिल जाये...
राधे कृष्ण कृष्ण राधे, एक दूजे में ऐसे विराजे...
भेद न कोई जाने...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...


कर तन मन है न्योछावर, मोहन से जो मिला दे...
श्यामा गुणगान करू मैं, जो श्यामके दरश करा दे...
एक सृष्टी और एक है दोनों, दोनो के आधार है दोनों...
अब तो दरश करा दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



मिल जाये श्याम मुझको, जीवन सफल हो मेरा...
मोहन के पावन हृदय में, हर पल हो वास तेरा...
अधर पे बंशी हृदय में राधे, रटते है श्याम राधे राधे...
श्याम तेरे है राधे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



तुने श्याम से मिलन कराया, तुझको नमन हो मेरा...
नाम जग में मेरी राधे, सबसे बड़ा हो तेरा...
वेद पुराण का सार हैं दोनों, भव के पालन हार है दोनों...
शीश तू 'अमन' झुका दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



राधे ओ राधे, राधे ओ राधे...
कान्हा रूठा, दिल टुटा...
अब तू ही आसरा दे...
मुझे श्याम से मिला दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!

भजन : "श्री अमन जी"




Friday, December 10, 2010

!! कमलनयन केशव सुनो, म्हारे दिल री बात...!!



!! म्हारा कमलनयन केशव जी !!




कमलनयन केशव सुनो, म्हारे दिल री बात...
मैं अति दीन अनाथ हूँ, आप हो नाथ सनाथ...



दाता आप रे द्वार पर, आ गयो दीन अनाथ...
सुननी पड़सी केशव तन्ने, इस दर्दी की बात...



यादां करता आपकी, दुखन लाग्या नैन..
गद् वाणी म्हारी हुई गई, निकसे नाहि वैन...



म्हाने तो बस चाहिये, थारे चरणा री धुर...
थारी भक्ति प्रेम सु, मन होवे भरपूर...



पाप स म्हाने बचाईज्यो, करके दया दयाल...
अपणों भगत बनाईज्यो, म्हाने करो निहाल...



हाथ जोड़ विनती करू, सुनज्यो कृपानिधान...
साध संगत सुख दीज्यो, दया नम्रता दान...



कमलनयन केशव सुनो,म्हारे दिल री बात...
मैं अति दीन अनाथ हूँ, आप हो नाथ सनाथ...



!! थारी जय जय हो श्री कमलनयन केशव !!
 
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