!! ॐ !!


Monday, December 13, 2010

!! प्रेम का अमृत पान करे है, मोहन रसीला...!!


आहा!!!... अनुपम रूप मेरो नीलमणि, नीलवरण, सांवरो श्यामसुन्दर को...




मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...
श्याम रंगीला, रंग है नीला, छैल छबीला...मेरे सांवरे का...



नीलवरण है रूप नीलाम्बर, घुँघरवाला केश रे..
मोर मुकुट माथे प विराजे, राज कुँवर सा वेश रे...
पीली पीताम्बर, केशरी फटका, कुर्ता है पीला..मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



मुरलीधर घनश्याम कन्हैया, गिरधारी मतवाला रे...
चंचल, चतुर, चालाक, साँवरा, लगता भोला भाला रे..
बड़ा रंगीला कृष्ण कन्हैया, मन का है ढीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



कानो में कुण्डल पहने, सोहे वैजयंती माला रे..
वन उपवन में गैया चराये, वंशी बजाये मतवाला रे...
प्रेम का अमृत पान करे है, मोहन रसीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



कहते है तेरे भगत मुरारी, अपने रंग में रंग ले रे...
आओ प्रभु जी दरस दिखाने, राधा रुक्मण संग ले रे...
हम भी तेरे दर आयेंगे, देखने रूप सजीला...मेरे सांवरे का...
मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...



मेरे सांवरे का रंग है, आकाशी नीला...मेरे सांवरे का...
श्याम रंगीला, रंग है नीला, छैल छबीला...मेरे सांवरे का...


!! जय हो नीलमणि, नीलवरण, सांवरा श्यामसुन्दर जी की !!

1 comment:

  1. वाह! बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है सांवरे का ……………दिल को छू गया।

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

लिखिए अपनी भाषा में