!! ॐ !!


Saturday, December 11, 2010

!! राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे... !!




श्री राधारानी जी, श्री कृष्ण की परम आह्लादिनी शक्ति हैं... और ऐसा हम सभी जानते है, बिना श्री राधे रानी की कृपा से हम श्री कृष्ण के दर्शन की इच्छा मात्र भी व्यक्त नहीं कर सकते... स्वयं श्री कृष्ण आनन्दरूपी चन्द्रमा हैं और श्री राधेरानी जी उनका प्रकाश है... श्री कृष्ण जी लक्ष्मी को मोहित करते हैं परन्तु श्री राधा रानी जी अपनी सौन्दर्य सुषमा से उन श्री कृष्ण को भी मोहित करती हैं...



परम प्रिय श्री राधा नाम की महिमा का स्वयं श्री कृष्ण ने इस प्रकार गान किया है-"जिस समय मैं किसी के मुख से ’रा’ अक्षर सुन लेता हूँ, उसी समय उसे अपना उत्तम भक्ति-प्रेम प्रदान कर देता हूँ और ’धा’ शब्द का उच्चारण करने पर तो मैं प्रियतमा श्री राधा का नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे-पीछे चल देता हूँ"



सो, हम सभी कृष्ण प्रेमियों का एक मात्र आश्रय श्री राधा रानी जी ही है, तो आइये हम भी श्री राधा रानी जी से इन मधुर भावो के साथ विनती करते है...





राधे ओ राधे, राधे ओ राधे...
कान्हा रूठा, दिल टुटा...
अब तू ही आसरा दे...
मुझे श्याम से मिला दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



सुनता हूँ मेरे कान्हा, तेरे दिल में है समाये..
राधे को जो आराधे, उसे श्याम स्वयं मिल जाये...
राधे कृष्ण कृष्ण राधे, एक दूजे में ऐसे विराजे...
भेद न कोई जाने...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...


कर तन मन है न्योछावर, मोहन से जो मिला दे...
श्यामा गुणगान करू मैं, जो श्यामके दरश करा दे...
एक सृष्टी और एक है दोनों, दोनो के आधार है दोनों...
अब तो दरश करा दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



मिल जाये श्याम मुझको, जीवन सफल हो मेरा...
मोहन के पावन हृदय में, हर पल हो वास तेरा...
अधर पे बंशी हृदय में राधे, रटते है श्याम राधे राधे...
श्याम तेरे है राधे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



तुने श्याम से मिलन कराया, तुझको नमन हो मेरा...
नाम जग में मेरी राधे, सबसे बड़ा हो तेरा...
वेद पुराण का सार हैं दोनों, भव के पालन हार है दोनों...
शीश तू 'अमन' झुका दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



राधे ओ राधे, राधे ओ राधे...
कान्हा रूठा, दिल टुटा...
अब तू ही आसरा दे...
मुझे श्याम से मिला दे...



अब तू ही आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे तू आसरा दे, मुझे श्याम से मिला दे...
राधे ओ राधे...राधे ओ राधे...



!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!

भजन : "श्री अमन जी"




2 comments:

  1. तूने राधा नाम ना लीन्हा
    तेरा व्यर्थ गया रे जीना

    बेहद भावप्रवण भक्तिभाव से परिपूर्ण भजन

    ReplyDelete
  2. जय राधे!बहुत अच्छी prastuti .
    क्रिएटिव मंच आप को हमारे नए आयोजन
    'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में भाग लेने के लिए
    आमंत्रित करता है.
    यह आयोजन कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे से शुरू हो रहा है .
    आप का सहयोग हमारा उत्साह वर्धन करेगा.
    आभार

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

लिखिए अपनी भाषा में