!! ॐ !!


Wednesday, July 13, 2011

!! हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी... !!


हे मेरे प्रिय श्यामसुन्दर, आपके श्री चरणों के दास की आपके चरण कमलों में अरदास है, कि...



हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



ये माना की, गलती मुझसे हुई है, भुलाया है तुझको...
अपने पराये का, भेद न जाना, क्षमा करो मुझको...
आखिर तो मैंने, याद किया है, तुमको मुरारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



दीनों के नाथ तुने, दुखिया कोई हो, गले से लगाया...
गोद में बिठाके, उसके आंसू को पोंछा, थोडा थपथपाया...
करुणा के सिंधु, इधर भी नज़र कर, मैं कब का दुखारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



हमने सुना है कान्हा, तेरी खुदाई का, जोर नहीं है...
जाये कहाँ हम कान्हा, तेरे सिवा कोई, ठौर नहीं है...
दो बूंद सागर से, हमको को भी दे दो, हो तृप्ति हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...
हे दीनबंधु! शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी...



!! जय हो सैदव प्रिय श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो सदैव दीनबंधु, कृपासिंधु भगवन की !!

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