!! ॐ !!


Tuesday, July 12, 2011

!! तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते... !!



मेरा स्वयं का ऐसा मानना है, कि दुःखदायी परिस्थिति प्रभु के विधान से हमारे कल्याण के लिए ही आती है... अतः उसे हमें मिटाने की चेष्टा में तत्परता न दिखाते हुए शांतिपूर्वक भगवत भजन करते हुए सह लेना चाहिए... माता कुंती ने भी एक बार श्री कृष्ण से करवद्ध हो वरदान मांगते हुए यह कहा था, कि "हे कृष्ण, दे सकते हो तो मुझे सदा दुःख देना, ताकि इस संसार की आसक्ति को छोड़, तुममें हमारी आसक्ति सदैव बनी रहे, सुख दोगे तो हो सकता है, संभवतः हमे तुम्हे भूल भी जाये..."


इस संसार में आसक्ति की गलती में लिप्त, जब कभी भी हमें किसी सांसारिक दुःखदायी परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, तो स्वभावतः हमारा मन भी व्याकुल हो उठता है, और अपने आप को हारा हुआ सा महसूस करने लगता है... परन्तु प्रभु में सच्ची श्रद्धा होने के कारण उस मन को समझने में देर नहीं लगती कि यह परिस्थिति भी प्रभु के विधान से हमारे कल्याण के लिए है, तो वह मन अपने इष्ट और अपने प्रभु से अपने आप को सबल बनाने, अंतर्मन में निहित समस्त दोषों को दूर करने एवं प्रभु के श्री चरणों के प्रति विश्वास को और दृढ करने हेतु इस प्रकार निश्चल ह्रदय से करवद्ध हो प्रार्थना करने लगता है...





तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...
तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



नादानी जी को जलाये, व्याकुलता बढ़ती जाये...
बैरी मोहन मन मेरा, मुझे क्या क्या रंग दिखाये...
रंगो के रंगमहल मे, हमे नित नये सपने आते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



प्रभु निश्चय अटल बना दे, विश्वास का रंग चढा दे...
गुण गाऊंगा मै तेरा, मेरे सारे दोष मिटा दे...
निर्बलता से मै हारा, मुझे क्यो न सबल बनाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



प्रभु हार गया अब आओ, मुझे आकार सबल बनाओ...
दामन असुवन से भींगा, 'नंदू' यु न अजमाओ...
है शरम प्रभु हमें खुद पर, हम फिर भी चलते जाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते..
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते..
तुम पग पग पर समझाते, हम फिर भी समझ न पाते...
ये कैसा दोष हमारा, हम गलती करते जाते...



!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!
!! जय हो मेरे प्रिय श्री श्यामसुन्दर जी की !!


भजन : "श्री नंदू जी'

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