!! ॐ !!


Friday, January 21, 2011

!! प्रियतम की याद आ गई, प्यारे की याद आ गई...!!



आज अपने सांसारिक जीवन में व्यस्त एवं माया में लिपटे एक प्रभु प्रेमी को प्रियप्रभु की ही कृपा से ही आकास्मात ही अपने प्रियतम कन्हैया की याद हो आ गई... मन मस्तिष्क से एवं हृदय पटल पर अपने प्रियतम की इस छवि को विराजित कर अपने प्रियतम, अपने कन्हैया की याद में विचरने वाला वह प्रभु प्रेमी, उस याद में ही अत्यंत आत्मिक आनंद की अनुभूति करता है... और अपने प्रियतम के प्रेम से पूरित उस प्रभु प्रेमी का अत्यंत ही आनंदित हृदय यह कह रहा है, कि...




कानूडा की याद आ गई, कन्हैया की याद आ गई...
प्रियतम की याद आ गई, गिरधर की याद आ गई...
प्यारे की याद आ गई, कानूडा की याद आ गई...
याद में विचरने दो, ले लूँssss थोड़ा मजा...
याद में विचरने दो, ले लूँssss थोड़ा मजा...



मन बगिया का उड़ता पंक्षी, डाल डाल डोले...
फुदक फुदक कर चहक चहक कर, बोल मधुर बोले...
उड़ते हुए पंक्षी को, मीठे बोर चुनने दो...
उड़ते हुए पंक्षी को, मीठे बोर चुनने दो...
ले लूँssss थोड़ा मजा... ले लूँssss थोड़ा मजा...



मेरे प्रभु प्रेमियों..!!! प्रभुप्रेमी वह जीव, जिसे अपने प्रियतम से अत्यंत प्रेम तो है परन्तु सांसारिक परिस्थितिवश, एवं विवशतावश कभी कभी अपने प्रियतम के प्रति अपनी भावनाये व्यक्त नही कर पाता है... जिसका उसे अत्यंत ही दुःख है... अतएव वह बहुत ही करुण एवं व्यथित हृदय से इस प्रकार अपने प्रियतम से अपने हृदय की भावनाये व्यक्त करते हुए कहता है...


हे कन्हैया, हे साँवरिया, हे श्यामसुन्दर...


पिंजरे माहि बंद पखेरू, बार बार हाले...
लाख फुदकना चाहे, उसका जोर नही चाले...
माया ने शिकंजा कसा, थोड़ा तो निकलने दो...
माया ने शिकंजा कसा, थोड़ा तो निकलने दो...
ले लूँssss थोड़ा मजा... ले लूँssss थोड़ा मजा...



याद में तेरी ओ साँवरिया, नयन लगे झरने...
झर-झर बहकर आँसू, दिल की बात लगे कहने...
मेरे हृदय पे मोहन, श्याम रंग चढ़ने दो...
मेरे हृदय पे मोहन, श्याम रंग चढ़ने दो...
ले लूँssss थोड़ा मजा... ले लूँssss थोड़ा मजा...



बहुत कठिन है ओ मेरे भगवन, यूँ जीवन जीना...
शीतल मीठी धार छोड़कर, कड़वा जल पीना...
'नंदू' दया कर मोहन, चरणों में ही रहने दो...
'नंदू' दया कर मोहन, चरणों में ही रहने दो...
ले लूँssss थोड़ा मजा... ले लूँssss थोड़ा मजा...



कानूडा की याद आ गई, कन्हैया की याद आ गई...
प्रियतम की याद आ गई, गिरधर की याद आ गई...
प्यारे की याद आ गई, कानूडा की याद आ गई...
याद में विचरने दो, ले लूँssss थोड़ा मजा...
याद में विचरने दो, ले लूँssss थोड़ा मजा...



!! जय जय हो प्रियतम कन्हैया की !!
!! जय जय हो प्रियतम प्यारे की !!
!! जय जय हो प्रियतम कानुडा की !!
भाव की प्रस्तुति : "श्री नंदू जी"

3 comments:

  1. भक्तिभाव भरा बहुत ही सुन्दर भजन्।

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