!! ॐ !!


Monday, September 6, 2010

!! म्हारो पाछा जातां, जीव घणो दुःख पावे जी सांवरा... !!





म्हे जद-कदे भी श्रीधाम वृंदावन म अपणा आराध्य देव सांवरिया श्यामसुन्दर और श्री राधा जी रा दर्शन करवां ताई जावां हा, तो म्हाने भोत ही सुखद एहसास और परम आनंद री अनुभूति होवे ह... जिस न शब्दा रा माध्यम सुं, कोणि बतलायो जा सक ह...


परम पवित्र श्रीधाम वृंदावन री श्री यमुना जी री कल-कल करती धारा, वाटिका म लागग्योड़ा फुला रा झुण्ड, और उन फुला पर बैठेड़ा भंवरा री गुंजन, रास लीला रा गान मन न मुग्ध कर लेवे है... उस श्री धाम वृंदावन म, जठे कोई भगवत वाच रहयो ह, तो कोई गीता... कोई सांवरिया श्यामसुन्दर जी री कथा कहवे ह, तो कोई श्री राधा जी रा भजन गावे ह... अइया लागे जईया सगला जाना अपने आप न सांवरिया श्यामसुन्दर और श्री राधा जी रा चरणा म अर्पित कर दिया ह... और जईया आठो प्रहर सांवरिया श्यामसुन्दर और श्री राधा जी स शुरू होर सांवरिया श्यामसुन्दर और श्री राधा जी पर ही ख़तम हो जावे ह...


सांवरिया श्यामसुन्दर और श्री राधा जी रा दर्शन करके म्हारो चित्त हर्षित होर बागा हालो मोरियों जईया नाचवा लागे ह... लेकिन जद म्हारा सांवरिया सुं विदाई लेवा री बेला आवे ह तो म्हारो जीवड़ो घणो दुःख पावे ह... और चित्त म्हारा युगल सरकार सुं बारम्बार यही अरदास करे ह की, वे म्हाने जल्द ही वापस अपने श्री धाम म बुलावे और अपनी श्री चरणा री प्रीत नित निरंतर म्हारा हिवड़ा म बढ़ाता रहवे...




ओ जी ओ भक्तां रा प्यारा सांवरिया...
थारे भक्तां न थे, भोत ही प्यारा लागो जी सांवरा...


थांसू मिलकर चाल्या थारा टाबरिया...
म्हारो पाछा जातां, जीव घणो दुःख पावे जी सांवरा...


थारे द्वारे मौज उड़ाया खूब घणो...
जो आनंद आयो, जावे न बतलायो जी सांवरा...

 

जी भर कर के दर्शन थारा खूब करया...
थारी भाँति भाँति की, झांकी प्यारी लागी जी सांवरा...


भजन सुन्यां जयकारा बोल्या चाव सुं...
म्हे श्री यमुनी जी म, डुबकी खूब लगाया जी सांवरा...


हंसी ख़ुशी अब भेजो थारे द्वार सुं...
थे नजर दया की सदा बनाई राखो जी सांवरा...



प्रेम भाव सुं जद जद म्हे थाने याद करां...
थे मत न देर लगाज्यो, बेगा आज्यो जी सांवरा...


जातां जातां थारे सुं अरदास करां...
म्हारो ख्याल रखज्यो, भूल कदे मत जाज्यो जी सांवरा...


म्हारी तो विनती थारे सुं म्हारा श्यामसुन्दर...
थारे श्रीचरणा री, प्रीत बढाता रहिज्यो जी सांवरा...




ओ जी ओ भक्तां रा प्यारा सांवरिया...
थारे भक्तां न थे, भोत ही प्यारा लागो जी सांवरा...


थांसू मिलकर चाल्या थारा टाबरिया...
म्हारो पाछा जातां, जीव घणो दुःख पावे जी सांवरा...


          !! जय जय श्री राधा श्यामसुन्दर जी !!

1 comment:

  1. यमुना के तट पर गौवें चराकर .
    छीन लिया मेरा मन मुरली बजाकर .
    हृदय हमारे बसो नन्दलाल .
    आओ आओ आओ आओ यशोदा के लाल .
    बहुत ही उत्कृष्ट रचना है|

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