!! ॐ !!


Thursday, August 19, 2010

!! तेरे साथ से गुलाम अब, गुलफाम हो रहा है... !!





हे! मेरे श्यामसुन्दर...

जितना दिया तुने इस दास को, उतनी तो मेरी औकात नहीं..
यह तो करम है सिर्फ तेरा, वरना मुझेमें तो ऐसी कोई बात नहीं...
ये तो करम है मेरे स्वामी का, यह तो करम है मेरे श्यामसुन्दर का..
वरना मुझेमें तो ऐसी कोई बात नहीं...

हे! मेरे श्यामसुन्दर...


 




हे! मेरे श्यामसुन्दर...


मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...


पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही हैं...
हैरान है ज़माना, मंजिल भी मिल गयी हैं...
करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...


तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज़ की कमी है...
किसी और चीज़ की अब, दरकार भी नहीं हैं...
तेरे साथ से गुलाम अब, गुलफाम हो रहा है...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...


मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं...
इस टूटी हुए वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं...
तेरी प्रेरणा से ही सब, यह कमाल हो रहा हैं...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...


करता नहीं मैं फिर भी, हर काम हो रहा हैं...
श्यामसुन्दर तेरी बदौलत, आराम हो रहा हैं...
बस होता रहे हमेशा, जो कुछ भी हो रहा हैं...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...


मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...
























ओ मेरे श्यामसुन्दर, जब आपकी कृपा इस दास पर हो ही रही है तो, मैं क्यों किसी और के पास जाऊं ??? क्यों मैं किसी और का अहसान लूँ, मुझे तो बस अब तेरे नाम का ही सहारा काफी हैं...


अहसान लूँ किसी का, ये मुझको नहीं गंवारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


माना की धीरे धीरे, मेरी नाव चल रही है...
लेकिन सही दिशा में, मंजिल पे बढ़ रही हैं...
भले देर से मिले पर, मिल जायेगा किनारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


काबिल नहीं हूँ जिसका, वो इनाम ले लिया हूँ...
पूछे बिना ही तुमसे, तेरा नाम ले लिया हूँ...

इसके सिवा लिया न, कुछ और तो तुम्हारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


तेरा नाम लेके जागुं, तेरा नाम लेके सोऊं ,
तेरे नाम के सहारे, जीवन अपना बिताऊं,
अपना तो चल रहा है, आराम से गुजारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


तेरे नाम का करिश्मा, मैंने तो जब से जाना...
सब छोड़ कर हुआ मैं, तेरे नाम का दीवाना...
मुझको तो सारे जहां से, तेरा नाम लगता प्यारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


अहसान लूँ किसी का, ये मुझको नहीं गंवारा...
जीने को जब काफी हैं, तेरे नाम का सहारा...


मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...
करते हो तुम श्यामसुन्दर, मेरा नाम हो रहा है...
मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा हैं...
मेरा आपकी दया से, सब काम हो रहा हैं...



!! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!
 

1 comment:

  1. धन्य हुए दर्शन पाकर और सुनकर.

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