!! ॐ !!


Monday, August 23, 2010

!! आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर... !!






आहा!! कितना मनोरम दृश्य हैं... ये सावन का सुहाना महिना.... श्री धाम वृन्दावन के कुंजो में गुदगुदाने वाली हरी मखमली घास... वृज के सम्पूर्ण वनों में भी केवल हरीतिमा ही हरीतिमा.... आसमान में उमड़ते-घुमड़ते कजरारे बादलों की अनुपम छटा... मयूरों का नर्तन... बालू में नहाती हुई चिड़ियों का कलरव.... पेडों से टपकती रिमझिम बूंदें, और उसी पेड़ पर बने झूले में झूलते हुए श्यामसुन्दर सरकार के अधरों पर रसीली बांसुरी की मधुर तान सुन श्रीमती राधेरानी का आगमन और उनका हिंडोरे में विराजना और सखियों के द्वारा युगल सरकार को झुला झुलाना....


अरे छाई सावन की है बदरिया, और ठंडी पड़े फुहार...
जब श्यामसुंदर बजाई बांसुरी, झूलन चली अलबेली सरकार...




ओ सावन का महिना, घटाए घनघोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...


प्रेम हिंडोरे बैठे, श्यामसुन्दर बिहारी...
झुला झुलाये सारी, वृज की नारी...
जोड़ी लागे प्यारी, ज्यू चंदा और चकोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...


ठंडी फुहार पड़े, तन को लुभाये...
गीत गावे सखियाँ, और श्याम मुस्काये...
बांसुरियां बजावे, मेरे मन का चितचोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...


यमुना के तट पे नाचे, ता था तै था थैया...
श्री राधा को झुलाये, श्यामसुन्दर रासरचइया...
जग में छाई मस्ती, और मस्त हुए मनमोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...


देख युगल छवि, मन में समाई...
'श्यामसुंदर' ने  महिमा गाई...
देख के प्यारी जोड़ी मनवा हुए विभोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...


ओ सावन का महिना, घटाए घनघोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...
आज कदंब की डाली झूले, श्रीराधा नंदकिशोर...




एक बार की बात है कि, सावन के इसी पुनीत महीने में प्रिया राधा जी, प्रिय श्यामसुन्दर से रूठ जाती है... और प्रिया जी की यह मान मुद्रा, हमारे श्यामसुन्दर को बैचैन कर देती हैं, और वे श्री राधा जी को मनाने के लिए भिन्न भिन्न प्रयास करते हुए, एक कदंब के पेड़ के निकट खड़े हो, इस प्रकार अपनी वंशुरी के मधुर राग में श्री राधा जी से कहते है...



झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...


सावन सुहाना आया, गर्जन भी साथ लाया..
गर्जन भी साथ लाया..गर्जन भी साथ लाया..
अब देर न लगाओ...जल्दी करो तैयारी ...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...


श्री वंशीवट पे प्यारी, सुन्दर कदंब की डारी...
सुन्दर कदंब की डारी...सुन्दर कदंब की डारी...
सुन्दर सजा है झुला...जल्दी पधारो प्यारी...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...


झुला तुम्हे झुलाऊ, और बांसुरी सुनाऊ...
और बांसुरी सुनाऊ...और बांसुरी सुनाऊ...
अब मान को त्यागो, ये रुत बड़ी है प्यारी...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...


झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...
सुन्दर सजा है झुला...जल्दी पधारो प्यारी...
अब मान को त्यागो, ये रुत बड़ी है प्यारी...
अब देर न लगाओ...जल्दी करो तैयारी ...
झूलो की रुत है आई, ओ श्री राधा प्यारी...


और श्री श्यामसुन्दर के प्रेम के वशीभूत हो प्रिय राधा जी अपने मान को त्याग, श्यामसुन्दर के संग झूले में विराजित होती हैं, और श्यामसुंदर उन्हें अपने हाथो से झूले में झुलाते हैं...



आइये अब आप सभी को मेरे मित्र "अंकित अग्रवाल" के निवास स्थान में आयोजित परम पुनीत श्री झूलन महोत्सव में श्री राधा श्यामसुन्दर बिहारी जी की अनुपम झाँकी के दर्शन इस सुन्दर श्री भाव के साथ करवाता चलू...






















सावन की बरसी, ठंडी फुहार...
पेड़ो पे झूलो की, लगी कतार...
राधा झुला झूल रही, संग श्याम के...


श्याम की बांसुरिया, गीत मल्हार के गा रही हैं...
बदलो से जैसे, आज मोती से बरसा रही है...
पवन चले पुरवाई..
राधा झुला झूल रही, संग श्याम के...






















कूकती है कोयल, पिहू पिहू पपीहा पुकारे..
हर कदंब की डारी, बोले आओ सांवरिया हमारे..
झूलन की रुत आई...
राधा झुला झूल रही, संग श्याम के...






















ग्वाल बाल साखियाँ, आज होके मगन नाचते हैं...
हाथ जोड़ इनसे, आशीर्वाद सब मांगते हैं...
महिमा इनकी जग न्यारी...
राधा झुला झूल रही, संग श्याम के...





















इस युगल छवि का, कौन बन जायेगा न दीवाना...
राधा जू शमा सी, परवाना से लगते हैं कान्हा...
छवि मेरे मन भाई...
राधा झुला झूल रही, संग श्याम के...

सावन की बरसी ठंडी फुहार...
पेड़ो पे झूलो की लगी कतार...
राधा झुला झूल रही संग श्याम के...


!! जय जय श्री राधाश्यामसुन्दर !!

4 comments:

  1. Very nice presentation. आप की लेखने की शैली अतीव मनोरम और दिलचस्प है ॥ राधे राधे!

    ReplyDelete
  2. इन मधुर मधुर शब्दों के लिए, आपको बहुत बहुत धन्यवाद जगत प्रभु जी....

    !! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी की !!

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

लिखिए अपनी भाषा में