!! ॐ !!


Saturday, August 28, 2010

!! रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे... !!




आहा!!! कितनो अनुपम और मनोहारी रूप ह थारो, ओ श्यामसुन्दर...

हे! प्रिय श्यामसुन्दर... निःसंदेह थारा यो आकर्षक, नयनाभिराम अद्भुत रूप, और थारे संग लागे री प्रीत ही, थारे समस्त प्रेमियों के चंचल चित्त न थारे प्रतिपल दर्शन की चाह के लिए और भी उद्विग्न कर देवे ह... थारे प्रेमियों के, बावरे नैन भी थारी यादां म आंसुड़ा बरसावे ह... अब तो देर न करो... बेगा सा पधारो न...और अपने प्रेमियों न अपणे श्री चरणों की धुल सुं कृतार्थ करो न...ठीक उसी तरह जिस तरह सुं थे, श्रीराधाभाव विभावित विग्रह वाले, श्री हरिनाम के उपदेशक श्रीकृष्णचैतन्य गौरचंद्र और निताईचंद्र क ऊपर अपनी करुण कृपा बरसाई थी...

ह्रदय म श्री श्यामसुन्दर जी रो साँचो प्रेम ही, उनका प्रेमियां का आंख्या सुं आंसुड़ा का रूप म बरसे ह... श्री गौरचंद्र और श्री निताईचंद्र जी री आंख्या भी इसी तरह  प्रभु री विरह वेदना सुं, श्री श्यामसुन्दर जी री प्रीत रा सागर म हमेशा डूबी रहती थी...और हर पल उनका ह्रदय म यहीं भाव रहतो की कद सी श्री श्यामसुन्दर दरश दिखाकर हिवड़े सुं लगावगा...

         श्री श्यामसुन्दर जी रा प्रेम म निमग्न श्री गौरचंद्र


रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे...
ओ श्यामसुन्दर थांसू मिलने को, म्हारो मनरो तरसे...


जल बिन मछली तड़पे जईया, थां बिन थांको दास...
चाँद चकोरी जईया म्हाने, चाह मिलन की आस...

     श्री श्यामसुन्दर जी रा प्रेम म निमग्न श्री निताईचंद्र


रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे...
ओ श्यामसुन्दर थांसू मिलने को, म्हारो मनरो तरसे...


थांसू मेरो प्रेम हुओ कोई, पूर्व जनम का लेख...
आंख्या म बस जाओ म्हारे, जईया काजल की रेख...



          श्री श्यामसुन्दर जी रा प्रेम म नाचता श्री गौरांग निताई

रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे...
ओ श्यामसुन्दर थांसू मिलने को, म्हारो मनरो तरसे...


याद थारी आते ही श्यामसुंदर, देखूँ चारो ओर...
मस्ती म मैं अईया नाचूँ, जईया जंगल में मोर...

          श्री श्यामसुन्दर जी रा प्रेम म नाचता श्री गौरांग निताई


रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे...
ओ श्यामसुन्दर थांसू मिलने को, म्हारो मनरो तरसे...


अब तो बेगा पधारों सांवरिया, म्हे निहाराँ थारी राह...
थांसू मिलने री हो जावे पूरी, म्हारे मन री चाह...

                    श्री श्यामसुन्दर, श्री गौरचंद्र न हिवड़े सुं लगावता

रिमझिम रिमझिम म्हारी आंख्या स, आंसुड़ा बरसे...
ओ श्यामसुन्दर थांसू मिलने को, म्हारो मनरो तरसे...

 
             !! जय जय श्री श्यामसुन्दर जी !!

  !! जय जय श्री गौरचंद्र, जय जय श्री निताईचंद्र !!

       
         हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
             हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे

2 comments:

  1. मुकेश जी, विशेष आभार भावपूर्ण चित्र प्रस्तुत किये.

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  2. bahut hi bhawpuran or romanchit kr den walo geet ha g..geet k ya to mn ri dsha ha jo apne aaradhya k aage apno tn mn aatma rakh k..prem nivedan kiyo gyo ha... bot bot mnbhawto ha g ..

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